भारत में ISSN नंबर रजिस्ट्रेशन कैसे करें (2026)

ISSN (International Standard Serial Number) यानी ‘अंतर्राष्ट्रीय मानक क्रम संख्या’ किसी भी शोध पत्रिका (Research Journal), समाचार पत्र, मैगज़ीन या पीरियोडिकल के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या है। भारत में अकादमिक अनुसंधान (Academic Research) और डिजिटल पब्लिशिंग के बढ़ते चलन के बीच, 2026 में अपनी पत्रिका या जर्नल की विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए ISSN रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कदम बन चुका है。

यह विस्तृत गाइड आपको भारत में ISSN नंबर प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया, नए नियम, आवश्यक दस्तावेज़ और समय-सीमा के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करेगी।


ISSN नंबर क्या है और यह क्यों जरूरी है?

ISSN एक 8-अंकों का कोड होता है, जो किसी निरंतर प्रकाशित होने वाले संसाधन (जैसे पत्रिकाओं, अखबारों, और ऑनलाइन जर्नल्स) को विशिष्ट रूप से पहचानता है। 2026 के डिजिटल युग में इसकी आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

  • वैश्विक पहचान (Global Identification): आपकी पत्रिका को अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस में शामिल किया जाता है。
  • यूजीसी केयर लिस्टिंग (UGC-CARE List): भारत में किसी भी रिसर्च जर्नल को मान्यता दिलाने या UGC-CARE लिस्ट में शामिल होने के लिए ISSN होना अनिवार्य है।
  • फर्जी पत्रिकाओं से सुरक्षा: यह आपके प्रकाशन को डुप्लीकेट या साहित्यिक चोरी (Plagiarism) करने वाले फर्जी जर्नल्स से अलग पहचान देता है。
  • बारकोड निर्माण: इसकी मदद से पब्लिशर्स अपनी प्रिंटेड मैगज़ीन या जर्नल के लिए कमर्शियल बारकोड तैयार कर सकते हैं。

भारत में ISSN जारी करने वाली संस्था कौन सी है?

भारत में ISSN जारी करने का एकमात्र अधिकार CSIR-NIScPR (National Institute of Science Communication and Policy Research) के पास है, जो नई दिल्ली में स्थित है। इसे ISSN नेशनल सेंटर – इंडिया (ISSN National Centre – India) भी कहा जाता है。


ISSN नंबर के प्रकार (Types of ISSN)

प्रकाशन के माध्यम के आधार पर ISSN दो प्रकार के होते हैं:

  1. p-ISSN (Print ISSN): यह कागज़ पर छपने वाली पत्रिकाओं, अखबारों या किताबों की श्रृंखला के लिए जारी किया जाता है।
  2. e-ISSN (Online ISSN): यह पूरी तरह से इंटरनेट पर प्रकाशित होने वाले ई-जर्नल्स, वेबसाइट-आधारित पीरियोडिकल और डिजिटल रिसर्च पेपर्स के लिए होता है।

💡 महत्वपूर्ण नोट: यदि आप अपनी पत्रिका को प्रिंट और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में प्रकाशित करते हैं, तो आपको दोनों के लिए अलग-अलग आवेदन करना होगा। दोनों के लिए एक ही नंबर का उपयोग नहीं किया जा सकता。


2026 में ISSN रजिस्ट्रेशन के लिए पात्रता और शर्तें (Eligibility Criteria)

आवेदन करने से पहले आपके प्रकाशन को इन नियमों को पूरा करना आवश्यक है:

  • निरंतरता (Continuity): प्रकाशन का एक निश्चित अंतराल होना चाहिए (जैसे: मासिक, त्रैमासिक, या वार्षिक)।
  • संपादकीय बोर्ड (Editorial Board): जर्नल की वेबसाइट या प्रिंट कॉपी पर एक वैध एडिटोरियल बोर्ड की जानकारी होनी चाहिए, जिसमें प्रोफेसरों की संस्थागत संबद्धता (Institutional Affiliations) और ईमेल आईडी शामिल हों。
  • शुरुआती अंक (Initial Issues): आवेदन करने से पहले आपकी पत्रिका का कम से कम पहला अंक प्रकाशित होना आवश्यक है, जिसमें कम से कम 5 से 6 मूल शोध लेख (Original Research Articles) शामिल हों。
  • सक्रिय वेबसाइट (केवल ऑनलाइन जर्नल के लिए): वेबसाइट पूरी तरह चालू होनी चाहिए और उस पर पब्लिशर का नाम, पता, जर्नल का स्कोप और कॉपीराइट पॉलिसी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए。

आवश्यक दस्तावेज़ (Required Documents)

आवेदन के समय आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की स्व-सत्यापित (Self-Attested) प्रतियां अपलोड और सबमिट करनी होंगी:

दस्तावेज़ का प्रकारप्रिंट जर्नल (Print ISSN) के लिएऑनलाइन जर्नल (e-ISSN) के लिए
पब्लिशर का पहचान पत्रआधार कार्ड / वोटर आईडी / पासपोर्टआधार कार्ड / वोटर आईडी / पासपोर्ट
शीर्षक पृष्ठ (Title Page)मुख्य कवर पेज और टाइटल पेज की कॉपीवेबसाइट का मुख्य स्क्रीनशॉट (यूआरएल के साथ)
संपादकीय पृष्ठएडिटोरियल बोर्ड के सदस्यों की सूची व विवरणवेबसाइट पर उपलब्ध एडिटोरियल बोर्ड का यूआरएल लिंक
शोध लेख (Articles)प्रथम अंक के 5-6 मूल लेखवेबसाइट पर लाइव प्रकाशित 5-6 रिसर्च आर्टिकल्स
RNI रजिस्ट्रेशनआरएनआई (RNI) का प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)लागू नहीं

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